Monday, March 03, 2008
India India
What a fantastic knock, what an awesome victory...I hope we don't have to play the third final :)
Tuesday, February 05, 2008
बारिश
आज छतरी बंद किए भीगता रहा बारिश में ......
बहुत देर इंतज़ार भी किया ...
पर माँ डांटने नहीं आई।
****************************************************
पता है आज भी बारिश में उसी खिड़की के पास बैठा करती हूँ ...
और चुप से देखती हूँ बूंदों के खेल ....
चाय भी बनाती हूँ वैसी ही इलायची वाली....
गलती से दो कप ही बन जाती है अक्सर ....
तुम्हारी आदत सी हो चली है ना ।
बहुत देर इंतज़ार भी किया ...
पर माँ डांटने नहीं आई।
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पता है आज भी बारिश में उसी खिड़की के पास बैठा करती हूँ ...
और चुप से देखती हूँ बूंदों के खेल ....
चाय भी बनाती हूँ वैसी ही इलायची वाली....
गलती से दो कप ही बन जाती है अक्सर ....
तुम्हारी आदत सी हो चली है ना ।
Saturday, December 01, 2007
चाँद
कभी कभी जब थक जाता हूँ इस रोज़ की भागम-भाग से...
तो देख लेता हूँ चाँद को...
रोज़ आता है नाइट शिफ्ट पर...
महीने में सिर्फ एक दिन की छुट्टी..
और कभी शिक़ायत तक नहीं करता।
****************************************************
फुटपाथ पर सोना आसान नहीं होता...
वो भी भूखे पेट..
आँखे मींचनी पड़ती हैं, नींद आये न आये..
वर्ना चाँद दिख जाता है...
कम्बख्त रोटी की याद दिला देता है ना।
****************************************************
चाँदनी से बुन लेता हूँ अक्सर सपनों की एक चादर सी...
जिसे ओढ़ के सो लेता हूँ चैन से कुछ देर..
हर सवेरे आ जाता है मगर हकीक़त का सूरज...
और खो जाती है मेरी चादर...
उसकी रौशनी में कहीं।
****************************************************
रात को सिगरेट जलाये अक़्सर चाँद को देखा करता हूँ ...
वो भी तो मेरी तरह कितना तन्हा है ...
जैसे अपनी ही चाँदनी में तलाश रहा हो किसी को ...
चाँदनी में साफ़ नज़र आता है मुझे उसकी तन्हाई का दर्द ...
मेरी सिगरेट का धुंँआ भी चाँद तक पंहुचता होगा क्या ?
तो देख लेता हूँ चाँद को...
रोज़ आता है नाइट शिफ्ट पर...
महीने में सिर्फ एक दिन की छुट्टी..
और कभी शिक़ायत तक नहीं करता।
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फुटपाथ पर सोना आसान नहीं होता...
वो भी भूखे पेट..
आँखे मींचनी पड़ती हैं, नींद आये न आये..
वर्ना चाँद दिख जाता है...
कम्बख्त रोटी की याद दिला देता है ना।
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चाँदनी से बुन लेता हूँ अक्सर सपनों की एक चादर सी...
जिसे ओढ़ के सो लेता हूँ चैन से कुछ देर..
हर सवेरे आ जाता है मगर हकीक़त का सूरज...
और खो जाती है मेरी चादर...
उसकी रौशनी में कहीं।
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रात को सिगरेट जलाये अक़्सर चाँद को देखा करता हूँ ...
वो भी तो मेरी तरह कितना तन्हा है ...
जैसे अपनी ही चाँदनी में तलाश रहा हो किसी को ...
चाँदनी में साफ़ नज़र आता है मुझे उसकी तन्हाई का दर्द ...
मेरी सिगरेट का धुंँआ भी चाँद तक पंहुचता होगा क्या ?
Friday, November 30, 2007
खामोशी
"बात तो हम सबसे करते हैं, ये जो खामोशी है ना ये बड़ी कीमती होती है, सबसे बाँटी नहीं जाती।" यही कहा करती थी न तुम....
आज भी उन खामोशियों में ढूंढा करता हूँ ऐसी कई बातें जो तुम शायद कह नहीं पायी, या मैं समझ ना सका.....
आज भी उन खामोशियों में ढूंढा करता हूँ ऐसी कई बातें जो तुम शायद कह नहीं पायी, या मैं समझ ना सका.....
Thursday, November 29, 2007
Woke up at 5:30 pm...Had a coffee....going back to sleep...life is good!
Woke up at 10:00 am....f*** the alarm, I need some sleep....shit! I'm late for the meeting....sweet, I can sleep some more..life is good!
Woke up at 1:00 pm....can't sleep more, need to go for this meeting...done with the meeting....can go back to sleep...life is still good!
Man, I love my life...I wish it remains like this forever!
Woke up at 10:00 am....f*** the alarm, I need some sleep....shit! I'm late for the meeting....sweet, I can sleep some more..life is good!
Woke up at 1:00 pm....can't sleep more, need to go for this meeting...done with the meeting....can go back to sleep...life is still good!
Man, I love my life...I wish it remains like this forever!
Wednesday, August 15, 2007
Friday, August 10, 2007
EuPhodDiya ??
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