Monday, March 09, 2009

दुनिया ओ दुनिया

I was planning on sleeping early (read before 1 am), when I read an extremely positive music review for Gulal, and decided to check the songs out. Its almost 3 now, and I am still listening to this song. Wonderful lyrics and music, and a truly unique voice (Piyush Mishra is the music director, lyricist, and singer). I still haven't checked out the rest of the album, but I guess I am not getting past this one for tonight.

दीवानी होती तबियत की दुनिया .... ओ दुनिया
ख्वाहिश में लिपटी ज़रूरत की दुनिया ...ओ दुनिया
ये इंसान के सपनों की नीयत की दुनिया ... ओ दुनिया

पलछिन में बातें चली जाती हैं
पलछिन में रातें चली जाती हैं
रह जाता है जो सवेरा वो ढूंढे
जलते मकाँ में बसेरा वो ढूंढे
जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो ये दुनिया ....
अपना समझ के अपनों के जैसी उठा लो ये दुनिया
छिट-पुट सी बातों में जलने लगेगी संभालो ये दुनिया
कट-पिट के रातों में पलने लगेगी संभालो ये दुनिया