Did anyone else notice how the commentators in the current version of IPL have been asked to call a SIX as a DLF maximum? As if the "strategy" breaks were not enough to get more advertisement money. I can only imagine things getting worse from here on, like having a sponsor name for each player as well as the fielding positions. Very soon we shall hear commentory like: That was hit by Kingfisher Gambhir straight to 502 Pataka Harbhajan standing at deep TT underwear point.
I was never a fan of T20, and this is making things all the more worse.
Tuesday, April 28, 2009
Tuesday, April 21, 2009
Sunday, April 05, 2009
adhuri ek talaash
Here is a song that we composed. Will update when I have a better version. Here are the lyrics:
कुछ अधूरी बातें जो ना कह सके कभी,
चंद तन्हा रातें तेरी याद में जो कटीं..
बातें वो कभी तो सुन जा,
आ कभी तन्हाइयाँ मिटा..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
उलझे सवालों में,
सुलझे ख्यालों में,
हैं बस तेरे ही निशाँ...
बेरंग ख्वाबों से,
खामोश गीतों से,
हैं ये पल तेरे बिना..
कभी रंग ख्वाबों में भर जा..
आ गीतों को दे दे जुबां..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
बिन तेरे लगता है
जीना बेमानी है,
काटें हैं तन्हाइयाँ..
सेहरा की रेतों पे,
पानी के धोखे सी,
तेरी ये परछाइयाँ ...
सबब धडकनों का बस तू है,
हसरत की तू इन्तेहाँ..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
कुछ अधूरी बातें ....
Kuch Adhuri baatein
jo na keh sake kabhi
chand tanha raatein
teri yaad mein jo katii
baatein wo kabhi to sun jaa
aa kabhi tanhaiyan mita
ban ke reh gayi hai tu meri
ek adhuri aas, adhuri pyaas,
adhuri ek talaash
Uljhe sawalon mein
suljhe khayalon mein
hain bas tere hi nishaan
berang khwabon se
khaamosh geeton se
hain ye pal tere bina
kabhi rang khwabon mein bhar jaa
aa geeton ko de de zubaan
ban ke reh gayi hai tu meri
ek adhuri aas, adhuri pyaas,
adhuri ek talaash
Bin tere lagta hai
jeena bemaani hai
kaate hain tanhaaiyan
sehraa ki reton pe
paani ke dhoke si
teri ye parchhaiyan
sabab dhadkano ka bas tu hai
hasrat ki tu inteha
ban ke reh gayi hai....
कुछ अधूरी बातें जो ना कह सके कभी,
चंद तन्हा रातें तेरी याद में जो कटीं..
बातें वो कभी तो सुन जा,
आ कभी तन्हाइयाँ मिटा..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
उलझे सवालों में,
सुलझे ख्यालों में,
हैं बस तेरे ही निशाँ...
बेरंग ख्वाबों से,
खामोश गीतों से,
हैं ये पल तेरे बिना..
कभी रंग ख्वाबों में भर जा..
आ गीतों को दे दे जुबां..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
बिन तेरे लगता है
जीना बेमानी है,
काटें हैं तन्हाइयाँ..
सेहरा की रेतों पे,
पानी के धोखे सी,
तेरी ये परछाइयाँ ...
सबब धडकनों का बस तू है,
हसरत की तू इन्तेहाँ..
बन के रह गयी है तू मेरी
एक अधूरी आस, अधूरी प्यास
अधूरी एक तलाश.....
कुछ अधूरी बातें ....
Kuch Adhuri baatein
jo na keh sake kabhi
chand tanha raatein
teri yaad mein jo katii
baatein wo kabhi to sun jaa
aa kabhi tanhaiyan mita
ban ke reh gayi hai tu meri
ek adhuri aas, adhuri pyaas,
adhuri ek talaash
Uljhe sawalon mein
suljhe khayalon mein
hain bas tere hi nishaan
berang khwabon se
khaamosh geeton se
hain ye pal tere bina
kabhi rang khwabon mein bhar jaa
aa geeton ko de de zubaan
ban ke reh gayi hai tu meri
ek adhuri aas, adhuri pyaas,
adhuri ek talaash
Bin tere lagta hai
jeena bemaani hai
kaate hain tanhaaiyan
sehraa ki reton pe
paani ke dhoke si
teri ye parchhaiyan
sabab dhadkano ka bas tu hai
hasrat ki tu inteha
ban ke reh gayi hai....
Monday, March 09, 2009
दुनिया ओ दुनिया
I was planning on sleeping early (read before 1 am), when I read an extremely positive music review for Gulal, and decided to check the songs out. Its almost 3 now, and I am still listening to this song. Wonderful lyrics and music, and a truly unique voice (Piyush Mishra is the music director, lyricist, and singer). I still haven't checked out the rest of the album, but I guess I am not getting past this one for tonight.
दीवानी होती तबियत की दुनिया .... ओ दुनिया
ख्वाहिश में लिपटी ज़रूरत की दुनिया ...ओ दुनिया
ये इंसान के सपनों की नीयत की दुनिया ... ओ दुनिया
......
पलछिन में बातें चली जाती हैं
पलछिन में रातें चली जाती हैं
रह जाता है जो सवेरा वो ढूंढे
जलते मकाँ में बसेरा वो ढूंढे
जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो ये दुनिया ....
अपना समझ के अपनों के जैसी उठा लो ये दुनिया
छिट-पुट सी बातों में जलने लगेगी संभालो ये दुनिया
कट-पिट के रातों में पलने लगेगी संभालो ये दुनिया
......
दीवानी होती तबियत की दुनिया .... ओ दुनिया
ख्वाहिश में लिपटी ज़रूरत की दुनिया ...ओ दुनिया
ये इंसान के सपनों की नीयत की दुनिया ... ओ दुनिया
......
पलछिन में बातें चली जाती हैं
पलछिन में रातें चली जाती हैं
रह जाता है जो सवेरा वो ढूंढे
जलते मकाँ में बसेरा वो ढूंढे
जैसी बची है वैसी की वैसी बचा लो ये दुनिया ....
अपना समझ के अपनों के जैसी उठा लो ये दुनिया
छिट-पुट सी बातों में जलने लगेगी संभालो ये दुनिया
कट-पिट के रातों में पलने लगेगी संभालो ये दुनिया
......
Tuesday, February 10, 2009
शाम, रात और सुबह
ढलता सूरज उतर आया था गिलास में, जिसे चाय में घोल के पी रहा था वो । जैसे नदी पीया करती थी, रोज़ शाम धीरे-धीरे ।
नदी किनारे घंटों बैठे रहते थे वो, सूरज ढलने के भी बहुत देर बाद तक ।
"गहरी बातें किया करो उल्लू, ऐसी अठन्नी चवन्नी बातें कर के कुछ नहीं होगा तुम्हारा । "
"ये नदी जितनी गहरी ? "
" हाँ गहरी, नदी से भी बहुत ज़्यादा । "
" गहरी बातों में भी डूब के मर पाता होगा कोई ? "
सिखा दिया है दिल्ली ने खोखली, गहरी बातें करना । उसकी याद आने पे महसूस होता है सर दर्द, थकान, जलन, प्यार, लालसा; सब कुछ एक साथ। याद आता है गाँव, पेड़, नदी, इमली, हँसी, रोना, प्यार, साइकिल, चाय... । और भी बहुत कुछ महसूस होता है । और हाँ बहुत ज़ोर से रोने का भी मन करता है कभी कभी ।
"अच्छा बड़े हो के क्या बनोगे तुम ? "
"लेखक बनूँगा, बहुत सारी आधी किताबें लिखूंगा । "
"आधी क्यूँ ?"
"पूरी कहानी मालूम किसे होती है, नाटक करते हैं लोग सब जानने का !"
अब पूरी कहानी जानने की हिम्मत भी कहाँ बची है । कहानी अधूरी थी तो थे सपने, डर, जोश, घबराहट, आशाएं.. । कुछ सपने अभी भी बाकी हैं, जिन्हें वो बड़ा सहेज के रखता है । रोज़ रात को निकालता है एक सपना, और उसके आँचल में सो लेता है चैन से कुछ देर । ताकी हिम्मत रहे सवेरे हकीकत का सामना करने की, कहानी का एक और पन्ना पलटने की ..........
नदी किनारे घंटों बैठे रहते थे वो, सूरज ढलने के भी बहुत देर बाद तक ।
"गहरी बातें किया करो उल्लू, ऐसी अठन्नी चवन्नी बातें कर के कुछ नहीं होगा तुम्हारा । "
"ये नदी जितनी गहरी ? "
" हाँ गहरी, नदी से भी बहुत ज़्यादा । "
" गहरी बातों में भी डूब के मर पाता होगा कोई ? "
सिखा दिया है दिल्ली ने खोखली, गहरी बातें करना । उसकी याद आने पे महसूस होता है सर दर्द, थकान, जलन, प्यार, लालसा; सब कुछ एक साथ। याद आता है गाँव, पेड़, नदी, इमली, हँसी, रोना, प्यार, साइकिल, चाय... । और भी बहुत कुछ महसूस होता है । और हाँ बहुत ज़ोर से रोने का भी मन करता है कभी कभी ।
"अच्छा बड़े हो के क्या बनोगे तुम ? "
"लेखक बनूँगा, बहुत सारी आधी किताबें लिखूंगा । "
"आधी क्यूँ ?"
"पूरी कहानी मालूम किसे होती है, नाटक करते हैं लोग सब जानने का !"
अब पूरी कहानी जानने की हिम्मत भी कहाँ बची है । कहानी अधूरी थी तो थे सपने, डर, जोश, घबराहट, आशाएं.. । कुछ सपने अभी भी बाकी हैं, जिन्हें वो बड़ा सहेज के रखता है । रोज़ रात को निकालता है एक सपना, और उसके आँचल में सो लेता है चैन से कुछ देर । ताकी हिम्मत रहे सवेरे हकीकत का सामना करने की, कहानी का एक और पन्ना पलटने की ..........
Wednesday, January 21, 2009
Monday, January 12, 2009
Slumdog Millionaire
Am I the only one who thought the movie was over-hyped, full of stereotypes, and not impressive at all? Music was good though.
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